अलविदा
Safe Access
तुमने उसे अपने गांव जाने की बात बताई और उसके चेहरे की सिलवटें,
तुम्हारे हाथ तक उसके हाथो का आने तक का झिझक भरा सफर देखा,
और 588 बस की भीड़ में तुमने देखा वो सरोजिनी के पास वाला बिलबोर्ड जहां बड़े-बड़े शब्दों में लिखा था
‘Future, Your Future’
सुनो उस बिलबोर्ड की बातों में ना आना,
मैं जानती हूं की तुम्हें लगता है की वो बड़ा सा बिलबोर्ड को हर दिन रास्ते में देखती हो,
और सोचती हो की वो तुम्हे कुछ इशारों में बताता है,
गलत बता रहा है,
सब झूठ है।
रिंकू तुम 588,569,794 की बस से सीधे आईएनए क्यों नही उतरती,
क्यों तुम उतर जाती हो सफदरजंग के बस स्टॉप पर,
और वो जो आता है रोज तुम्हें तुम्हारे की चित परिचित सड़कों को पार कर घर छोड़ने,
उसे बता दो की अब पैरो का दर्द ठीक है,
तुम चल सकती हो अकेले,
उनके रूई जैसे मुलायम झिझक भरे, हिचकिचाते हुए हाथो को बिना पकड़े,
उसे बता दो सच,
कह दो ना आया करे साथ।
तुम मत भूलो जानबूझ कर बस पास,
मेट्रो कार्ड मंदिर के नीचे वाले अलमारी के दराज में, TMS में ना साथ बैठो,
और कही रुक जाए पंजाबी बाग में,
लो ऑटो और लौट आओ घर।
तुम क्यों नही मानती,
इतना दूर क्यों पैदल सफर किया उसके साथ,
नेहरू प्लेस से आईएनए की सीधी बस थी ना,
वो 7 किलोमीटर क्यों चले तुम साथ,
रुक जाओ,
मान लो,
ये साथ कुछ ही दिनों का है।
तुम क्यों नोट्स के बहाने पूरे दिन रुकती हो कॉलेज,
उसके प्रोटेस्ट में जाने के बाद ना आते उसका क्यों इंतजार करती हो तुम,
कितनी और चाय और समोसा खाओगी तुम,
पूरे इलेक्शन उस 10 मिनट के उसके साथ के वॉक का,
पर्स में अब पैसे खतम हो चुके है,
उसके पास कभी वक्त था ही नहीं,
सब फरेब है,
रिंकू
समझो,
उसको बुधु कहती हो,
खुद ना बनो,
अब उसे फोन पर बात कम कर दो,
अनदेखा कर दो उसका हर मैसेज,
मत पूछो उसे बताने को की
‘मुझे कुछ हो गया है, जो अब ना तुमसे दूर ही जाने देता है, ना ही पास आने देता है’ का क्या मतलब है, मत करो सवाल की क्यों डिलीट कर दिया यह मैसेज,
मत खेलो अरूप सर की क्लास में कैंडी क्रश साथ, मत देखो एक दूजे की आंखों में चाय पीते वक्त,
मत लिखो और, और बस यूं ही।
उसके कुंडी और कुंजी वाले जोक पर ना हसों,
वो घर आया तो क्यों खुश थी,
उसे परिवार समझने की भूल ना करना पगली,
उसका नाम उसके नाम से ही सेव करो।
बेशक मां बाबा को वो पसंद है,
मगर तुम्हें नही पता,
यह क्या बेवजह हंसती रहती हो आज कल,
क्यों गई थी NSUI के पार्लियामेंट वाले ट्रिप में अकेले,
तुम्हे अकेला लग रहा था ना उस भीड़ में,
यही होगा आगे,
खो जाओगी भीड़ में।
और सबसे अहम सबसे जरूरी,
20 फरवरी को मत जाना कॉलेज,
चाहे दोस्त कितना भी बोले
‘आ जा नही तो केक नही काटूंगा तेरे बिना,’
ना दोस्त के कहने पर,
ना EOC के मीटिंग के लिए,
ना NSS के लिए
ना पेट्रीकोर में पोयम ही सुनाने के लिए,
ना डिपार्टमेंट मीटिंग के लिए,
ना खुद ही के लिए,
कुछ भी हो जाए 20 फरवरी को मत जाना कॉलेज,
क्योंकि उसके बाद 24 को तुम्हारे गांव जाने वाली बात पर वो कह देगा
‘एनिक्कु निन्ने इष्टमाण्’।
चुप-चाप चले आना,
कुछ ना कहना,
जान कर अंजान बन जाना,
मत जाहिर होने देना की,
तुम पहले ही पूछ चुकी हो दोस्त से
की ‘मलयालम में आई लव यू कैसे कहते है,’
आईएनए के उस चाय की दुकान या फूल की दुकान पर ना रुकना,
सीधे आ जाना,
क्योंकि यह सब तुम अगर मान लोगे,
तो नही बैठना पड़ेगा तुम्हे
गोल्ड बॉर्डर वाली, फूल प्रिंटेड सफेद साड़ी में,
बालो में मोगरे का गजरा लगाए,
और चांदनी चौक से खरीदे झुमके पहन कर सत्या के बस स्टॉप पर,
सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक,
पीते हुए आधी कप चाय बार बार,
उस एक ना आने के इंतजार में।
– रिंकू
Note: We do not endorse or guarantee the accuracy, completeness, or usefulness of any information provided. Consult your healthcare provider before making any healthcare decisions or changes to your treatment based on information obtained from this platform. In case of a medical emergency or urgent situation, please seek immediate medical attention or contact your local emergency services.